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बोला चीन, भारतीय सेना के पीछे हटे बगैर बातचीत का सवाल ही नहीं

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नई दिल्‍ली: सिक्किम सेक्टर में पिछले एक पखवाड़े से ज्यादा वक्त से जारी तनाव के बीच चीन का कहना है कि जब तक भारतीय सेना पीछे नहीं हटती तब तक किसी भी बातचीत का सवाल ही नहीं है. चीन के सरकारी मीडिया द्वारा युद्ध के विकल्प की बात किए जाने के बाद अब भारत में चीन के राजदूत लू झाओहुई ने कहा है कि यह भारत के रुख पर निर्भर करेगा कि सैन्य विकल्प का इस्तेमाल होगा या नहीं.
आधिकारिक चीनी मीडिया और थिंक टैंक की युद्ध के विकल्प को लेकर की गई टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘कई विकल्पों के बारे में बातें हो रही हैं. यह आपकी सरकार की नीति (सैन्य विकल्प का इस्तेमाल करना है या नहीं) पर निर्भर करता है’. इससे पहले चीन के सरकारी मीडिया और थिंक टैंक ने कहा था कि इस विवाद से अगर उचित तरीके से नहीं निपटा गया तो इससे ‘युद्ध’ छिड़ सकता है.
राजनयिक ने कहा कि चीन सरकार इस बात को लेकर बहुत स्पष्ट है कि वह स्थिति का शांतिपूर्ण समाधान चाहती है और इसके लिए इलाके से भारतीय सैनिकों की वापसी ‘पूर्व शर्त’ है.
झाओहुई ने कहा, ‘भारतीय सैनिकों की बिना शर्त भारतीय सीमा में वापसी पहली प्राथमिकता है. चीन और भारत के बीच किसी भी सार्थक संवाद के लिए यह पूर्व शर्त है’

चीनी सेना के एक निर्माण दल के सड़क बनाने के लिए आने के बाद पिछले 19 दिन से भूटान तिराहे के पास डोक ला इलाके में चीन और भारत के बीच गतिरोध चल रहा है. डोक ला इस क्षेत्र का भारतीय नाम है, जिसे भूटान डोकलाम के रूप में मान्यता देता है, जबकि चीन इसे अपने डोंगलांग इलाके का हिस्सा बताता है.

इस गतिरोध पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि ‘चीन की हालिया कार्रवाइयों से भारत गंभीर रूप से चिंतित है और उसने चीनी सरकार को इस बात से अवगत करा दिया है कि इस तरह के निर्माण से वर्तमान स्थिति में उल्लेखनीय परिवर्तन होगा और भारत की सुरक्षा को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हो जाएगी’.

इस पर चीनी राजनयिक ने कहा, ‘भारतीय पक्ष की तथाकथित ‘सुरक्षा चिंताओं’ को लेकर भारत ने सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के नाम पर दूसरे देश की सीमा में प्रवेश किया है, इससे कोई मतलब नहीं है कि वह वहां कौन सी गतिविधियां चलाता है, वह किसी भी संप्रभु देश के लिए स्वीकार्य नहीं है’. उन्होंने कहा, ‘अपनी सुरक्षा चिंताओं’ के नाम पर भारत अन्य देशों की सीमा में अतिक्रमण नहीं कर सकता है. अन्यथा, पूरे विश्व में अराजकता की स्थिति पैदा हो जाएगी’.